Nomadland is Pagglait

This is, by no means, a comparison.

Now, brush up your linguistic knowledge (I know only two languages) and ride on. Starting with Hindi for Pagglait, followed by a bit of thoughts on Nomadland.

Pagglait in English means Mad or Crazy.

There are no spoilers.

पगलैट (2021)

लेखक एवं निर्देशक – उमेश बिश्त

कुछ महीने पहले फेसबुक पर मैंने एक पोस्ट पढ़ा जिसमें एक लड़की अपनी बहन (शायद, चचेरी) को उसके तीसरे बच्चे की शुभकामनायें देते हुए एक तरह का अफ़सोस भी जताती है। उसका कहना था कि काश उसकी बहन १९ की उम्र में शादी करने के साथ-साथ और भी विकल्प दिए जाते जो उस लड़की को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करता। फिर, अगर उस लड़की ने शादी करने का सोचा होता तो फिर उसकी वही नियति होती।

हमारे देश के ज्यादातर छोटे शहरों एवं गांवों में लड़कियों को कई सारे बंधनों में इतनी खूबसूरती से जकड़ा जाता है कि वह अपने हक़ के फैसले भी अपने परिवार वालों के हिसाब से ले लेती है ये सोचते हुए कि ये निर्णय केवल उसका है। वह आजाद होने के बस भुलावे में होती है।

परिवार वालों से टोक कर पूछने पर वो पहले इसे उनका अत्यंत लगाव और बाद में अपनी जिम्मेदारी कहेंगे – “हम अपनी बच्ची का भला-बुरा बहुत अच्छी तरह से समझते हैं।”

और फिर बचपन से ही, ल़डकियों की पढ़ाई शुरू होते ही उनके आदर्श बहू बनने का प्रशिक्षण शुरू हो जाता है – घर के रोजमर्रा के काम से लेकर, रसोई में भोजन के साथ-साथ चूल्हे के आस-पास के सारे काम, चलने, बोलने, कपड़े पहनने, खाना परोसने और खाने के तौर-तरीके और तो और गृहणियों से संबंधित हर तरह की कुशलता में उन्हें निपुण किया जाता है। यह सब सीखना बुरी बात नहीं है, एक विशेष प्रयोजन जोकि २०-२२ साल में होना है के लिए उस लड़की की इच्छाओं को नियंत्रित कर सिखाना जरूर अजीब है। उधर, लड़की के पिताजी उसी शादी के लिए लाखों रुपये बैंकों में जमा करना शुरू कर देते हैं ताकि 18-22 साल बाद दहेज और शादी के खर्च में कोई कमी न हो। इस बीच, उन ल़डकियों को अजनबी लड़कों से बोलने-चालने की मनाही होती है; प्यार-मोहब्बत करना अपराध होता है।

ऐसी ही नाजो से पली एक लड़की की कहानी है Pagglait (पगलैट) जिसकी शादी के 5 महीने बाद उसके पति का देहांत हो जाता है। पर, लड़की को दुःख जैसा कुछ भी महसूस नहीं होता है। ये कहानी अंतिम क्रिया के रस्मों-रिवाज़, रिश्तेदारों, माता-पिता एवं पड़ोसियों की तनातनी, ईर्ष्या एवं मृत पति के शर्मसार करने वाले खुलते राज़ के बीच, उस लड़की के उन सारे अदृश्य बंधनों से आज़ाद होने के प्रक्रिया की कहानी है।

और ऐसी ही लड़की को कहा गया है पगलैट

फिल्म की पटकथा बहुत आसानी से हास्य (कॉमेडी) के चक्कर में भटक सकती थी जैसा ट्रेंड आयुष्मान खुराना और अक्षय कुमार ने सामाजिक विषयों वाली कहानी को कॉमेडी के रूप में प्रस्तुत करके चलाया है। पर, लेखक व निर्देशक ने इसे एक व्यक्तिगत कहानी के तौर पर संजीदा तरीके से चित्रित किया है।

ये समाज के सभी वर्गों, खासकर छोटे शहरों से आए लोगों को जरूर देखनी चाहिए ताकि अगर उनके अंदर ऐसी (ल़डकियों को अनायास ही घर की चारदीवारी में बांधने की ) मानसिकता अब भी है तो आँखें खुले।

और हाँ, मल्होत्रा ख़ानदान की लड़कीसान्या मल्होत्राकी अदाकारी से और, शायद, उस लड़की से आपको प्यार हो सकता है।

Nomadland

Written & Directed by Chloe Zhao

Ever happened when you suddenly take a halt from your stroll to see:

The leaves on the tallest tree and the ever-blue sky behind, the cuckoos are cooing; the birds are chirping and the cat just cross the road; there is a dog innocently stare at your and turn back to walk away; a couple in a Scooty (nowadays, with their mask on) passed by in a jiffy with a zoom sound; a song stuck in your head unconsciously comes on your lips; the kids flare their laughter when chasing each other down and fighting; a guy or a girl with a little over-shaped body is sweating in a park while running in round and round in the park?

And then you resume your walk, reach your home, wash your hands and mouth, do engage yourself in daily task you do like cutting vegetables or fruits, washing clothes, reading books, making tea/coffee, scrubbing your utensils with the scrub pads, taking a nice and long bath, wear your washed clothes, cook the food and eat it at your relaxing chair.

Nomadland is exactly like the experience you have every day but with additional racing your RV on the road, walking into the woods, climbing the small-big mountains, meeting other nomadlands, making good/bad/forever friends, laughing, giggling, solving a problem, heal your wound.

There is a certain documentary style Nomadland camera provides that has a enigmatic value in the storytelling but it doesn’t ask you to solve it; it requests you to embrace it. Frances McDormand cannot be taken lightly and with Chloe Zhao behind camera, direction and writing, she delivers the perfect worldly film with almost no actors that senses and captures life through its character-motivated camera.

With each location change in the film, I was wondering (almost imagining) how incredibly fun as well as mentally exhausting the shoot would have been.

At the end,

Although I promised in the beginning that this blog is not a comparison between the two films but I think I have some words to put both the films in one box:

Pagglait is a story of a lady living in boundaries to realize the meaning of freedom whereas the lady in Nomadland is crossing many state boundaries to find peace.

Watch one or both whatever you desire. Pagglait on Netflix. Nomadland on Disney Hotstar. Keep Reading Keep Humming Keep Watching Good Films.

Write your thoughts in the comment-section or at shiveshranjan7@gmail.com

Also, if you are interested to invest in a feature film or collaborate as a film crew or cast, write to me at randomsimiletalkies@gmail.com

My short films links are here – Random Simile Talkies

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