थोड़ा है थोड़ा बाकी – “जिन्हें नाज़ है” समीक्षा

आज सुबह की कॉफ़ी पीते वक़्त एक आदमी अचानक मेरे सामने मोपेड रोकता है और मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने लगता है। हेलमेट की वजह से पहचानने में…… Read more “थोड़ा है थोड़ा बाकी – “जिन्हें नाज़ है” समीक्षा”

बिखरे बिंब का गणित, वाणिज्य और भाव

नाटक को देखने के बाद खाने पर बात करते हुए किसी ने कहा कि उसके स्कूल के दिनों में गणित में step-marking होती थी। मैंने तुरंत हस्तक्षेप…… Read more “बिखरे बिंब का गणित, वाणिज्य और भाव”

कितना कुछ किया जा सकता था “दो कौड़ी के खेल में”

अगर ये इस नाटक का पहला मंचन होता तो इस समीक्षा का शीर्षक होता – कितना कुछ किया जा सकता है “दो कौड़ी के खेल में”, पर…… Read more “कितना कुछ किया जा सकता था “दो कौड़ी के खेल में””